कक्षा 9 वीं वार्षिक परीक्षा 2025
सेट – 944
विषय : सामाजिक विज्ञान
निर्देश :
1. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
2. प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। जिनके
लिए 1
x 30 = 30
अंक निर्धारित हैं।
3. प्रश्न क्रमांक 6 से 23 तक प्रत्येक में आंतरिक विकल्प
दिये गये हैं।
4. प्रश्न क्रमांक 6 से 17 तक प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 30 शब्द है।
5. प्रश्न क्रमांक 18 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 75 शब्द है।
6. प्रश्न क्रमांक 21 से 23 तक प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 120 शब्द है।
7. प्रश्न क्रमांक 23 मानचित्र आधारित प्रश्न है।
प्रादर्श उत्तर
प्रश्न.1 निम्नलिखित विकल्पों में से सही
विकल्प का चयन कर लिखिए - (1x6=6)
(i) कर्क रेखा किस राज्य से नहीं
गुजरती है ?
(अ) राजस्थान (ब) उड़ीसा
(स) छत्तीसगढ़ (द)
त्रिपुरा
उत्तर - (ब) उड़ीसा
(ii) किस नदी को दक्षिण गंगा कहते हैं
?
(अ) नर्मदा नदी (ब) कृष्णा नदी
(स) कावेरी नदी (द) गोदावरी
नदी
उत्तर - (द) गोदावरी नदी
(iii) नेल्सन मंडेला को रोबेन द्वीप
में कितने वर्ष के लिए कैद रखा गया था?
(अ) 28 वर्ष (ब) 25
वर्ष
(स) 22 वर्ष
(द) 20 वर्ष
उत्तर - (अ) 28 वर्ष
(iv) भारतीय संविधान ने नागरिकों को
कितने अधिकार दिए हैं?
(अ) 10 (ब)
8
(स) 5 (द)
6
उत्तर - (द) 6
(v) पालमपुर गाँव में विभिन्न
जातियों के लगभग कितने परिवार रहते हैं?
(अ) 350 परिवार (ब)
400 परिवार
(स) 450 परिवार (द)
550 परिवार
उत्तर - (स) 450
परिवार
(vi) हरित क्रांति आरंभ हुई -
(अ) 1950 के दशक में (ब)
1970 के दशक में
(स) 1960 के दशक में (द) 1980 के दशक में
उत्तर - (अ) 1960 के
दशक में
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1x6=6)
(i) उत्तरी मैदान ..................जलोढ़...................................
मृदा से बना है।
(ii) इम्पीरियल फारेस्ट रिसर्च
इंस्टिट्यूट की स्थापना सन ........1906...........में
देहरादून में हुई।
(iii) एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से
ज्यादा फसल पैदा करने को ........बहुविध फसल......प्रणाली कहते हैं।
(iv) 1943 में भारत में सबसे भयानक
अकाल ...........बंगाल ......... राज्य में पड़ा था।
(v) डॉ अम्बेडकर ने ...........संविधानिक उपचारों का अधिकार............. अधिकार
को संविधान की ‘आत्मा और ह्रदय’ कहा था।
(vi) 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत
में सबसे अधिक जनसंख्या .......उत्तरप्रदेश ........... में पाई जाती है।
प्रश्न 3 सत्य/असत्य लिखिए - (1x6=6)
i. देश
अर्थव्यवस्था में नदियों का महत्वपूर्ण स्थान है।
उत्तर – सत्य
ii. आम्रवृष्टि
मध्यप्रदेश में होती है।
उत्तर – असत्य
iii. गुज्जर-बकरवाल
समुदाय जम्मू और कश्मीर राज्य से है।
उत्तर – सत्य
iv. मानवीय पूँजी
से उत्पादकता में वृद्धि होती है।
उत्तर – सत्य
v. जनसंख्या
वृद्धि बेरोजगारी को बढाती है।
उत्तर – सत्य
vi. लोकतंत्र में
बेहतर निर्णय लिए जाते हैं।
उत्तर – सत्य
प्रश्न. 4 सही जोड़ियां बनाइये- (1x6=6)
सूची (अ) सूची (ब)
i. सक्रिय ज्वालामुखी अ. राशन कार्ड
ii. सुन्दरी वृक्ष ब. कार्यशील पूँजी
iii. चुनाव स. नई दिल्ली
iv. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द. बैरन द्वीप
v. कच्चा माल इ.
मेंग्रोव वन
vi. सार्वजानिक वितरण प्रणाली फ. 05 वर्ष
उत्तर –
सूची (अ) सूची (ब)
i. सक्रिय ज्वालामुखी द. बैरन द्वीप
ii. सुन्दरी वृक्ष इ. मेंग्रोव वन
iii. चुनाव फ. 05 वर्ष
iv. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग स. नई दिल्ली
v. कच्चा माल ब. कार्यशील पूँजी
vi. सार्वजानिक वितरण प्रणाली अ. राशन कार्ड
प्रश्न. 5 एक वाक्य में उत्तर
लिखिये - (1x6=6)
(i) भारत किस गोलार्द्ध में स्थित है?
उत्तर – उत्तरी
गोलार्द्ध में।
(ii) किसी स्थान की दीर्घ अवधि की
वायुमंदालीय दशा क्या कहलाती है?
उत्तर – जलवायु।
(iii) जर्मन संसद का क्या नाम है ?
उत्तर – बुन्डेस्टेग।
(iv) अदृश्य बेरोजगारी का दूसरा नाम
क्या है?
उत्तर – प्रछन्न
बेरोजगारी।
(v) केरल ने किस संसाधन के विकास पर
अधिक जोर दिया है?
उत्तर – मानव संसाधन
।
(vi) ‘सम्मन’ क्या है?
उत्तर – किसी
व्यक्ति को किसी न्यायलय अथवा शासकीय कार्यालय में उपस्थित होने के लिए दिया जाने
वाला आदेश पत्र।
प्र.6- बांगर किसे कहते हैं? 2
उत्तर- पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बने क्षेत्र को
भांगर कहते हैं।
अथवा
खादर किसे कहते हैं?
उत्तर- नवीनतम जलोढ़ मिट्टी का मैदान को खादर कहते हैं।
प्र.7- वन संरक्षण के दो उपाय लिखिए । 2
उत्तर- वन संरक्षण के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं:
·
वनों को काटने पर रोक लगाना
·
वनों में क्षतिपूरक वृक्षारोपण करना
·
वनों को आग से बचाना
·
वनों को ज़्यादा चराई से बचाना
·
वनों के महत्व के बारे में जन चेतना जागृत करना
·
वन संरक्षण और प्रबंधन के लिए ग्रामीण समितियां बनाना
·
वन संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाना
·
वनों को रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना
·
सामाजिक वानिकी को प्रोत्साहित करना
·
बाँधों और बहुउद्देशीय योजनाओं को बनाते समय वन संरक्षण का ध्यान रखना
अथवा
वनों के विनाश के दो कारण लिखिए ।
उत्तर- वनों के विनाश के
कारण :-
1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने से कृषि भूमि की प्राप्ति के लिए वनों को
काटकर खेती की जा रही है।
2. इमारती लकड़ी और चारे की बढ़ती माँग तथा वन्य भूमि के खेती के लिए उपयोग से वनों
पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा रहा है।
3. ईंधन के रूप में प्रयोग करने हेतु लकड़ी काटी जा रही है।
4. आवागमन के साधनों, रेल, सड़क मार्गों के विकास हेतु वनों को काटा जा
रहा है।
5. आवास समस्या की पूर्ति के लिए वनों को काटकर रिहायशी भूमि का विस्तार किया जा
रहा है।
प्र.8- वाल स्ट्रीट एक्सचेंज क्या है? 2
उत्तर- वॉल स्ट्रीट एक्सचेंज दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जो कि अमेरिका में
स्थित है।
अथवा
हिटलर को किसने चांसलर बनाया?
उत्तर- 30 जनवरी 1933 को राष्ट्रपति
हिंडनबर्ग ने हिटलर को चांसलर बनाया।
प्र.9- बस्तर में कौन-कौन से आदिवासी
समुदाय रहते हैं? 2
उत्तर- बस्तर में मरिया और मुरिया, गोंड,
धुरवा, भतरा, हल्बा आदि आदिवासी समुदाय
रहते हैं ।
मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्र के
वायुमंडल की स्थिति को बताता है।
अथवा
सुरोंतिको सामिन कौन था?
उत्तर- सुरोंतिको सामिन जावा का एक आदिवासी नेता था। जो कि रान्दुब्लातुंग गाँव का
निवासी था।
प्र.10- मसाई समाज कितनी श्रेणियों में बंटा
था? 2
उत्तर- मासाई समाज दो सामाजिक श्रेणियों में बंटा था: बुज़ुर्ग (एल्डर्स), योद्धा (वारियर्स)।
अथवा
बंजारे किन-किन प्रदेशों में रहते
थे?
उत्तर- बंजारे उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और
राजस्थान के प्रदेशों में रहते थे ।
प्र.11- संविधान की कोई दो विशेषताएं लिखिए
। 2
उत्तर- भारतीय संविधान की कई विशेषताएं हैं:
1.
यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है ।
2.
यह संविधान कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण है ।
3.
यह संघात्मकता और एकात्मकता का मिश्रण है ।
4.
यह संविधान, देश की
राजनीतिक व्यवस्था के लिए रूपरेखा तैयार करता है ।
5.
यह संविधान, देश के
प्रशासन का मार्गदर्शन करने वाले नियमों और विनियमों का एक समूह है ।
6.
यह संविधान, सरकार
के विधायी, कार्यकारी और न्यायिक अंगों को जोड़ता है ।
7.
यह संविधान, सभी
नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है ।
8.
यह संविधान, स्वतंत्र
न्यायपालिका को संविधान का उल्लंघन करने वाले कानूनों या सरकारी कार्यों को अमान्य
करने का अधिकार देता है ।
9.
यह संविधान, एकल
नागरिकता का प्रावधान करता है ।
10. यह संविधान, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विषयों
का विभाजन करता है।
अथवा
संविधान संशोधन से क्या आशय है?
उत्तर- संविधान में लिखित
प्रावधानों में समय-समय पर होने वाले बदलावों को संविधान संशोधन कहते हैं ।
प्र.12- मताधिकार किसे कहते हैं? 2
उत्तर – 18 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं
के द्वारा अपने जनप्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए दिया गया अधिकार मताधिकार
कहलाता है ।
अथवा
मतदाता सूची से क्या आशय है?
उत्तर– मतदान की योग्यता रखने वाले
मतदातों की सूची को मतदाता सूची कहते हैं। जो कि चुनाव के काफी समय पहले जारी कर दी जाती है।
प्र.13- संसद में कितने सदन हैं? 2
उत्तर – संसद के दो सदन होते हैं – 1.
लोकसभा 2. राज्यसभा
अथवा
केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में किन-किन
स्तर के मंत्री होते हैं ?
उत्तर – केन्द्रीय
मंत्री परिषद में अमूमन तीन स्तर के मंत्री होते हैं –
1.
कैबिनेट मंत्री
2.
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री
3.
राज्य मंत्री
प्र.14- प्राथमिक क्षेत्रक किसे कहते हैं? 2
उत्तर – प्राथमिक क्षेत्र - अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक संसाधनों को कच्चे तौर
पर प्राप्त किया जाता है। उसे प्राथमिक क्षेत्रक कहते हैं। यथा-उत्खनन, कृषि
कार्य, पशुपालन, मछली पालन, इत्यादि।
इसी क्षेत्रक को कृषि एवं सम्बद्ध गतिविधियाँ (Agriculture and
allied activities) भी कहा जाता है।
अथवा
द्वितीयक क्षेत्रक किसे कहते हैं?
उत्तर – द्वितीयक क्षेत्र - अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को
अपनी गतिविधियों में कच्चे माल (Raw Material) की तरह उपयोग करता है द्वितीयक क्षेत्र कहलाता है। उदाहरण के लिए
लौह एवं इस्पात उद्योग, वस्त्र
उद्योग, वाहन, बिस्किट, केक
इत्यादि उद्योग। वास्तव में इस क्षेत्रक में विनिर्माण (Manufacturing) कार्य होता है यही कारण है कि इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहा जाता
है।
प्र.15- भारत का अक्षांशीय व देशंतारिय
विस्तार लिखिए । 2
उत्तर – भारत का अक्षांशीय विस्तार 8° 4' उत्तर से 37° 6' उत्तर तक है और देशांतरीय विस्तार 68° 7' पूर्व से 97° 25' पूर्व तक है ।
अथवा
भारत के भू-भाग का क्षेत्रफल कितना है?लिखिए ।
उत्तर – भारत के भूभाग का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि. मी. है ।
प्र.16- फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण
क्या थे? 2
उत्तर – फ्रांस में क्रांतिकारी विरोध के लिए उत्तरदायी कारण
निम्नलिखित थे :-
फ़्रांस में क्रांति के कई कारण थे, जिनमें आर्थिक,
सामाजिक, और राजनीतिक कारण प्रमुख थे-
आर्थिक कारण
·
सात साल के युद्ध
के दौरान सैनिकों की उच्च लागत से देश का खज़ाना खाली हो गया था ।
·
अमेरिकी उपनिवेशों
को आज़ाद कराने में फ़्रांस ने मदद की थी ।
·
सरकार ने करों में
वृद्धि की, लेकिन अभिजात
वर्ग कर देने के लिए तैयार नहीं था ।
·
फ़सल की विफलताओं
ने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था ।
सामाजिक कारण
·
फ़्रांस में समाज
दो वर्गों में बंटा था - विशेषाधिकार वाले वर्ग में कुलीन लोग और पादरी ।
·
तीसरे वर्ग, जिसमें जनसंख्या का बहुमत शामिल था,
को प्रतिनिधित्व और राजनीतिक शक्ति के मामले में असमानता का सामना
करना पड़ा ।
·
उन पर भारी करों का
बोझ था और उनमें सामाजिक गतिशीलता का अभाव था ।
राजनीतिक कारण
·
फ़्रांस निरंकुश
राजशाही का केंद्र था ।
·
राजा लुई सोलहवें
और शाही दरबार द्वारा वर्षों तक किए गए फ़िजूलखर्ची के कारण राज्य का खज़ाना खाली
हो गया था ।
·
शोषणकारी राजनीतिक
और सामाजिक व्यवस्थाएं ।
तात्कालिक कारण
·
एस्टेट जनरल की
बैठक में कर वृद्धि का प्रस्ताव लाना ।
अथवा
‘महिला एवं नागरिक अधिकार घोषणा
पत्र’ किसने लिखा था?
उत्तर – ‘महिला एवं नागरिक अधिकार घोषणा पत्र ‘ ओलंप
दे गूज नमक महिला ने लिखा था ।
प्र.17- जन्म दर से क्या आशय है? 2
उत्तर – प्रति 1000 व्यक्तियों पर जीवित बच्चों के जन्म की संख्या को जन्म दर कहते हैं।
अथवा
प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर – किसी व्यक्ति या लोगों का एक जगह से दूसरी
जगह जाने को प्रवास कहते हैं ।
प्र.18- जनसँख्या घनत्व को प्रभावित करने
वाले किन्हीं तीन कारकों का वर्णन कीजिये
। 3
उत्तर –जनसंख्या के वितरण
व घनत्व को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं।
1. भीतिक अथवा भौगोलिक
कारक
2. आर्थिक कारक
3. सामाजिक-सांस्कृतिक
कारक
1. भौतिक अथवा भौगोलिक
कारक - भौगोलिक कारकों में निम्नलिखित को शामिल किया जाता है-
(क) विश्व के समतल मैदानी
भागों में ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी व पठारी भागों
की अपेक्षा अधिक लोग निवास करते हैं। मैदानी भागों में कृषि, जल-सिंचाई, यातायात, व्यापार तथा जीवन-निर्वाह की समस्त
सुविधाओं के कारण घनी आबादी (जनसंख्या) मिलती है।
(ख) जलवायु- तापमान
व वर्षा जनसंख्या के वितरण व घनत्व पर स्पष्ट प्रभाव डालते हैं। विश्व के जिन क्षेत्रों
में सम जलवायु है वहाँ विषम जलवायु की अपेक्षा अधिक लोग निवास करते हैं। अधिक तापमान
तथा अधिक शीतल प्रदेश जैसे मरुस्थल व ध्रुवीय प्रदेश लगभग मानव विहीन हैं। जिन क्षेत्रों
में वर्षा व तापमान सामान्य है तथा अनुकूल जलवायु है वहाँ जनसंख्या का अधिक घनत्व है।
(ग) मृदाएँ- कृषियोग्य
गहरी उपजाऊ मिट्टियों में अधिक जनसंख्या के भरण-पोषण की क्षमता होती है। नदी घाटियों
में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी बिछी होती है। अतः अनेक प्राचीन सभ्यताओं का विकास भी इन नदी
घाटियों में ही हुआ है। यहाँ कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी की प्रचुरता तो है ही, मीठे स्वच्छ जल के स्रोत भी यही नदियाँ
हैं। अतः विश्व की सभी नदी घाटियों में सघन जनसंख्या का घनत्व देखने को मिलता है।
(घ) जल-स्रोत-
झीलें व नदियाँ मीठे जल के मुख्य स्रोत हैं जबकि सागर व महासागरीय जल खारा होने के
कारण उपयोगी नहीं है। विश्व की प्राचीन सभ्यताओं का विकास नदी घाटियों में इसलिए हुआ
क्योंकि वहाँ पीने व सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध था। आज भी नदी घाटियों व मीठे
जल की झीलों के आसपास जनसंख्या का उच्च घनत्व मिलता है।
2. आर्थिक कारक
- विश्व के जिन भूभागों|/क्षेत्रों में खनिजों के प्रचुर भंडार हैं वहाँ उद्योगों का
विकास हुआ है तथा जहाँ समतल उपजाऊ भूमियाँ हैं वहाँ कृषि का विस्तार हुआ है। ऐसे क्षेत्रों
में लोगों को रोजगार के अवसर सुलभ होते हैं तथा अन्य आर्थिक क्रियाएँ जैसे यातायात
वे परिवहन की सुविधाएँ, बैंकिग व वाणिज्यिक गतिविधियाँ स्वतः ही विकसित हो जाती हैं।
अतः इन क्षेत्रों में नगरीकरण को बढ़ावा मिलता है। और लोगों के बसने के लिए अपकर्ष
का कारण होते हैं। धीरे-धीरे ही सही, ऐसे क्षेत्र आगे चलकर उच्च जनसंख्या घनत्व को केंद्र बनते
हैं।
3. सामाजिक-सांस्कृतिक
कारक- विश्व के कुछ क्षेत्रों का विकास सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में
होता है। प्राचीन काल से ही कुछ नगर धार्मिक आस्था के कारण, राजनीतिक गतिविधियों के कारण वाणिज्यिक
गतिविधियों के कारण, जीवन व सम्पत्ति की सुरक्षा
की दृष्टि से, सैन्य दृष्टि से तथा
सांस्कृतिक गतिविधियाँ, शिक्षा, स्वास्थ्य व मनोर॑जन की सुविधाओं के चलते महत्त्वपूर्ण हो जाते
हैं और लोगों को बसने के लिए आकर्षित करते हैं। इस तरह वहाँ मेगा नगरों का विकास हो
जाता है। विश्व के सर्वाधिक सघन बसे हुए ऐसे ही नगर व नगर क्षेत्र हैं जहाँ जनसंख्या
का घनत्व सर्वोच्च है। ।
अथवा
स्वस्थ जनसंख्या कैसे लाभकारी है?
उत्तर - आर्थिक और सामाजिक रूप से एक स्वस्थ और मजबूत
राष्ट्र बनाने के लिए, एक स्वस्थ जनसंख्या की आवश्यकता होती है। जो कि निम्न प्रकार से लाभकारी
होती है -
1. एक स्वस्थ व्यक्ति देश की प्रगति में सहायता
करता है।
2. एक स्वस्थ व्यक्ति देश की संपत्ति है।
3. स्वस्थ जनसंख्या अधिक उत्पादक होती है और
अधिक अर्जित करने में सक्षम होता है।
4. स्वस्थ जनसंख्या अपनी क्षमता की अनुभूति करने
में सक्षम होता है।
5. वे सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
6. वहां आर्थिक विकास होगा।
प्र.19- भारत के राष्ट्रपति की किन्हीं तीन
शक्तियों का वर्णन कीजिये । 3
उत्तर - भारतीय संविधान के तहत भारत के राष्ट्रपति
को अनेक प्रकार की शक्तियां एवं अधिकार प्राप्त है जैसे-
1. कार्यपालिका
शक्तियां
2. विधायी
शक्तियां
3. न्यायिक
शक्तियां
4. सैन्य
शक्तियां
5. विवेकी
शक्तियां
6. आपातकालीन
शक्तियां
राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियां
केंद्र सरकार की समस्त शक्तियां राष्ट्रपति के
हाथों में निहित होती है। राष्ट्रपति के नाम से देश की नीतियों का संचालन होता है।
राष्ट्रपति को निम्न पदों पर नियुक्ति करने का
अधिकार है -
ऽ प्रधानमंत्री
के सलाहकार मंत्रीपरिषद के अन्य सदस्यों;
ऽ सर्वोच्च
एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों;
ऽ भारत
के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक;
ऽ भारत
के महान्यायवादी;
ऽ राज्यों
के राज्यपाल;
ऽ मुख्य
चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त;
ऽ संघ
लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों;
ऽ वित्त
आयोग, भाषा आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय महिला
आयोग, मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग
एवं अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में रिपोर्ट देने वाले आयोग के सदस्यों;
ऽ राष्ट्रपति
विदेशी राजनयिकों का आमंत्रण-पत्र स्वीकार करता है तथा राजदूतों को नियुक्ति पत्र जारी
करता है।
राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां
ऽ राष्ट्रपति
संसद का अभिन्न अंग होता है। उसके हताशा से ही कोई कानून बनता है।
ऽ राष्ट्रपति
लोकसभा का प्रथम सत्र को संबोधित करता है तथा संयुक्त अधिवेशन बुलाकर अभी भाषण देने
की शक्तियां प्राप्त है।
ऽ राष्ट्रपति
को संसद सत्र आहूत, सत्रावसान करना एवं लोकसभा को भंग करने की शक्ति
भी रखता है।
ऽ नए
राज्यों के निर्माण राज्य की सीमा में परिवर्तन संबंधित विधेयक, धन विधेयक या संचित निधि से व्यय करने वाला विधेयकएवं राज्य
हित से जुड़े विधेयक बिना राष्ट्रपति के पूर्व अनुमति के संसद में प्रस्तुत नहीं होते
हैं।
ऽ राष्ट्रपति
लोकसभा के लिए आंग्ल भारतीय समुदाय से 2 सदस्य तथा राज्यसभा के लिए कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा क्षेत्र
के 12 सदस्यों को मनोनीत करने का शक्तियां प्राप्त है।
राष्ट्रपति की न्यायिक / क्षमादान शक्तियां
ऽ भारतीय
संविधान का अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराधी को सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंवन
करने, परिहार और सजा
लघुकरन करने का अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रपति को मृत्युदंड माफ करने का भी अधिकार
प्राप्त है।
ऽ क्षमा
:- दंड और बंदी कारण दोनों हटा दिया जाता है तथा दोषी को मुक्त कर दिया जाता है।
ऽ प्रविलंवन
:- राष्ट्रपति किसी धन पर रोक लगाता है ताकि दोषी व्यक्ति क्षमा याचना कर सके।
ऽ परिहार
:- दंड के स्वरूप में बिना परिवर्तन किए हुए उसकी अवधि कम कर दी जाती है।
ऽ लघुकरण
:- दंड के स्वरूप में परिवर्तन कर दिया जाता है।
ऽ राष्ट्रपति
शासन प्रशासन द्वारा प्राप्त सजा या कोर्ट मार्शल की सजा को माफ कर सकता है।
ऽ राष्ट्रपति
अनुच्छेद - 143 के अनुसार किसी भी सार्वजनिक हित के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से
परामर्श ले का अधिकार रखता है।
राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियां
ऽ भारत
के राष्ट्रपति के पास सैन्य बलों की सर्वोच्च कमांडर होता है।
ऽ राष्ट्रपति
को युद्ध और शांति की घोषणा करने तथा सैन्य बलों को विस्तार करने हेतु आदेश देने की
शक्ति प्राप्त है।
राष्ट्रपति की विवेकी शक्तियां
ऽ भारतीय
संविधान के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है किंतु विशेष परिस्थितियों
में उसे अपने विवेक से काम करना होता है वह स्थितियां निम्न है-
व जब
किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हो।
व पद
धारण किए व्यक्ति की अचानक मृत्यु की दशा में प्रधानमंत्री को नियुक्ति करनी हो।
व यदि
सत्तारूढ़ मंत्री परिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया हो।
राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां
भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को तीन स्थितियों
में विशिष्ट आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गई हैः-
ऽ अनुच्छेद
352 :- अनुच्छेद 352 के अंतर्गत युद्ध बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में
राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि पूरे भारत या किसी एक भाग की सुरक्षा खतरे में
है तो वह संपूर्ण भारत या किसी भाग में आपातकाल घोषणा कर सकता है।
ऽ अगर
यह अवधि 1 माह के पश्चात संसद से अनुमोदित ना हो तो ऐसी स्थिति में स्वतः समाप्त हो
जाती है। इस तरह की घोषणा को संसद के दो तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक होता है।
ऽ अनुच्छेद
356 :- अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यदि कोई राज्य सरकार संवैधानिक नियमों के अनुरूप कार्य
नहीं कर रही है तो राष्ट्रपति तत्काल की घोषणा
वहां ऐसी घोषणा को राष्ट्रपति शासन कहा जाता है जिसे संसद द्वारा 2 माह के भीतर अनुमोदन
करना आवश्यक होता है।
ऽ अनुच्छेद
360 :- अनुच्छेद 360 के अंतर्गत देश में आर्थिक संकट की स्थिति में राष्ट्रपति अपनी
विशिष्ट शक्तियों का प्रयोग कर वित्तीय आपात की घोषणा कर सकता है।
अथवा
भारत
के प्रधानमंत्री के किन्हीं तीन शक्तियों का वर्णन कीजिये ।
उत्तर- प्रधानमंत्री को निम्नलिखित शक्तियाँ
प्राप्त होती हैं :-
1. मंत्रीपरिषद के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
2. राष्ट्रपति के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
3. संसद के संबंध में शक्तियां
4. प्रधानमंत्री के अन्य कार्य
मंत्रीपरिषद के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
1. मंत्रीपरिषद
की बैठक को बुलाना तथा आयोजित बैठक की अध्यक्षता करना।
2. मंत्रियों
के लिए मंत्रालय निर्धारित करना।
3. मंत्रियों
के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों का नेतृत्व करना।
राष्ट्रपति के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
1. राष्ट्रपति
को सलाह देना (मंत्रियों की नियुक्ति आदि में)
2. तत्कालीन
योजनाओं एवं विकास कार्यों के बारे में राष्ट्रपति को अवगत कराना /सूचित करना।
संसद के संबंध में शक्तियां
1. प्रधानमंत्री
सम्पूर्ण मंत्रीपरिषद का प्रमुख होता है।
2. राष्ट्रपति
को लोकसभा के विघटन के लिए सलाह देना
3. संसद
में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
4. संसद
में जनता के सवालों का जवाब देते हैं।
प्रधानमंत्री के अन्य कार्य
1. नीति
आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
2. अंतर्राज्यीय
परिषद के अध्यक्ष
3. राष्ट्रीय
एकता परिषद
4. ऐसे
ही अन्य कई परिषद हैं जिनकी अध्यक्षता का दायित्व प्रधानमंत्री का होता है।
प्र.20-
भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे
‘निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम’ को लिखिए । कोई तीन । 3
उत्तर – भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे
‘निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम’ निम्नलिखित है -
भारत में गरीबी की समस्या के समाधान के प्रति
भारतीय योजनाकार शुरू से ही चिन्तित रहे हैं। इस
दिशा में जहां एक ओर आर्थिक संमृद्धि को बढ़ाने
का प्रयास किया गया है वहीं दूसरी ओर गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को अपनाया गया। ग्रामीण
क्षेत्रों के लोगों की आवश्यकतायें पूरी करने के लिये सरकार ने अनेक परियोजनाएँ शुरू
की हैं। गरीबी निवारण के प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित हैं-
1. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना : अप्रैल 1999 से आरंभ की गई इस योजना का उददेश्य गरीब परिवारों
को बैंक ऋण एवं सरकारी अनुदान के माध्यम से स्वसहायता समूहों के रूप में संगठित कर
तीन वर्षों की अवधि में गरीबी रेखा से ऊपर लाना है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण निर्धनों
के लिये पर्याप्त अतिरिक्त आमदनी जुटाने का लक्ष्य भी रखा गया है। यह जिला ग्रामीण
विकास अभिकरण के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।
2. स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना : दिसम्बर 1997 को यह योजना शहरी क्षेत्रों में गरीबी निवारण
के लिये प्रारंभ की गई। योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को स्वरोजगार उपक्रम स्थापित
करने के लिये वित्तीय सहायता देना है, तथा सवेतन रोजगार सृजन करने के लिये उत्पादन परिसम्पत्तियों
का निर्माण करना है।
3. प्रधानमंत्री रोजगार योजना : यह योजना 2 अक्टूबर 1993 से प्रारंभ की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों
तथा छोटे शहरों के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार
के अवसर उपलब्ध कराना है।
4. ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम : अप्रैल 1995 में यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे कस्बों
में परियोजनाएँ लगाने और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिये आरंभ की गई।
5. अन्नपूर्णा योजना : अप्रैल 2000 से यह योजना प्रारम्भ की गई। योजना का उद्देश्य
65 वर्ष या उससे
अधिक उम्र के उन लोगों को खाद्यान्न-सुरक्षा प्रदान कराना है, जो राष्ट्रीय
वृद्धावस्था पेंशन योजना के अन्तर्गत पेंशन प्राप्त करने के पात्र थे, परन्तु उन्हें
पेंशन नहीं मिल रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम खाद्यान्न
प्रति माह मुफ्त दिया जाता है। वर्ष 2002-03 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को इस
योजना में मिला दिया गया।
6. जनश्री योजना : गरीब वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने
के उद्देश्य से अगस्त 2000 में इस योजना को प्रारम्भ किया गया। योजना में
लाभार्थी को स्वाभाविक मृत्यु की दशा में रूपये 20,000, दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर रूपये
50,000 तथा आंशिक
विकलांगता पर 25,000 रुपये दिये जाते हैं।
7. सम्पूर्ण ग्रामीण रोज़गार योजना : यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्यान्न
सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रारम्भ की गई। योजना में काम में
लगे मजदूरों को दैनिक मजदूरी के रूप् में न्यूनतम 5 किलो अनाज और न्यूनतम 20 प्रतिशत मजदूरी
नकद दी जाती है। योजना का लक्ष्य समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना है।
8. ग्रामीण समृद्धि योजना : इस योजना को प्रारम्भ करने की घोषणा मार्च, 999 में की गई। वर्तमान में प्रचलित जवाहर रोजगार योजना को इस प्रकार परिवर्तित किया जायेगा कि सभी कोष ग्राम पंचायत के हाथ में व्यय करने के लिए हो, जिससे वे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में उसका उपयोग कर सकें । पंचायतों के पास यह अधिकार होगा कि वे कार्य के संबंध में वार्षिक योजनाएँ बनाएँ तथा उन्हें क्रियान्वित करें।
9. अन्त्योदय अन्न योजना : 25 दिसम्बर, 200। से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य लक्षित
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शामिल गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों
को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इस योजना में देश के .50 करोड़ गरीब परिवारों
को प्रति माह 35 किलोग्राम अनाज विशेष रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना के अंतर्गत जारी किये जाने वाले गेहूँ एवं चावल का केन्द्रीय निर्गम मूल्य
क्रमशः 2 रुपये तथा 3 रुपये प्रति
किलोग्राम है।
10. महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम
( 2005 ) : इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक निर्माण कार्यक्रम
के अधीन हर वर्ष प्रत्येक ग्रामीण, शहरी गरीब तथा निम्न मध्यम वर्ग के परिवार के
एक वयस्क व्यक्ति को कम से कम 00 दिन रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत माँग
करने पर 5 दिन के अन्दर
काम उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि निश्चित समय में काम उपलब्ध नहीं कराया जायेगा, तो सम्बन्धित
व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा। भत्ता न्यूनतम मजदूरी का कम से कम एक
तिहाई होगा। 2 फरवरी 2006 को देश के सर्वाधिक पिछड़े 200 जिलों में इसे लागू कर दिया गया है।
अथवा
भारत में निर्धनता बढने के प्रमुख
तीन कारण लिखिए ।
उत्तर - निर्धनता - निर्धनता वह स्थिति या स्तर है जहाँ
व्यक्ति की आय इतनी कम हो जाती है कि वह अपनी आधारभूत आवश्यकताओं को भी पूरा करने में
असमर्थ हो जाता है।
भारत में निर्धनता के कारण निम्नलिखित हैं :-
1. अशिक्षा
:- भारत में सन 2011 की जनगणना के अनुसार, अब तक जनसंख्या का केवल 73प्रतिशत
भाग ही
साक्षर है, इस प्रतिशत में वे व्यक्ति भी सम्मिलित है जो मामूली रूप से
लिख पढ़ सकते हैं। भारत में पुरुषों की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत है, वहीं महिलाओं
में साक्षरता दर केवल 64.6प्र तिशत है। महिलाओं
में कम साक्षरता का कारण परिवार और आबादी की जानकारी कमी है। जो कि भारत में निर्धनता
के कारण में प्रधान कारण है।
2. उद्योगों
की कमी :- भारत में आदमी का प्रमुख उद्योग शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है। ग्रामीण
क्षेत्रों में उद्योगों का उचित विकास नहीं हुआ है, जिस कारणवश वहां पर बेरोजगारी में वृद्धि होती
है।
3. सामाजिक
कारण :- देश में गरीबी के लिए जाति प्रथा, संयुक्त परिवार प्रथा, उत्तराधिकार
के नियम, शिक्षा व मानव
कल्याण के प्रति उदासीनता आज के अनेक कारण हैं, जो गरीबों को और गरीब बना रहे हैं।
4. प्रौद्योगिकी
का निम्न स्तर :- कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में परंपरागत उत्पादन तकनीकों ने प्रति
व्यक्ति उत्पादकता के स्तर को नीचा बनाए रखा है, जिसके कारण गरीबी और अधिक गहन हुई है।
5. श्रम
की मांग और पूर्ति में असंतुलन :- जब श्रमिकों की मांग कम होती है और उनकी पूर्ति बढ़
जाती है। तो समस्त श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाता और इस कारण बेरोजगारी मे
वृद्धि होती है। भारत में मजदूरों की अधिक संख्या में उपलब्धता भी निर्धनता का प्रमुख
कारण है।
6. जनसंख्या
में तीव्र वृद्धि :- भारत की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है, जिससे गरीबी
एवं बेरोजगारी की समस्या की गंभीरता और बढ़ गई है। 2.5प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की दर
से जनसंख्या का बढ़ना ग्रामीण श्रम पूर्ति की तीव्रता में वृद्धि करता है। श्रमिकों
की संख्या में जो तीव्रता से वृद्धि हो रही है, उसके अनुरूप रोजगार सुविधाएं नहीं बढ़ पाती हैं।
7. प्राकृतिक
प्रकोप :- हमारी अर्थव्यवस्था प्रकृति पर बहुत अधिक निर्भर है। प्राकृतिक प्रकोपो का
सामना करने के पर्याप्त साधनों का ना होना भी हमारी निर्धनता का एक प्रमुख कारण है।
8. तकनीकी
प्रशिक्षण :- रोजगार सुविधाओं को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है कि तकनीकी
प्रशिक्षण का कार्यक्रम अपनाया जाए। भारत में निर्धनता का यह एक प्रमुख कारण है।
9. ग्रामीण
ऋणग्रस्तता :- आय में कमी होने के कारण भारतीय कृषक दैनिक जीवन ऋण लेकर व्यतीत करता
है। वह ऋण अदा करने के लिए फसल पर निर्भर रहता है, लेकिन यदि प्राकृतिक प्रकोप या किसी अन्य समस्या
से उसकी फसल में नुकसान होता है तो वहां ऋण से ग्रसित हो जाता है। जिससे निर्धनता आ
जाती है।
10. आर्थिक कारण :- निर्धनता का संबंध आर्थिक
पहलुओं से भी है, आर्थिक दशा का वर्णन आय और व्यय के संबंध में
किया जाता है। अपर्याप्त उत्पादन असमान वितरण आर्थिक उच्च वचन निर्धनता एवं बेरोजगारी
आदि को जन्म देता है। भारत में उत्पादन के लिए परंपरागत साधनों का प्रयोग किया जाता
है जिसके कारण यहां पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता है।
प्र.21- फरवरी क्रांति की प्रमुख घटनाओं और
प्रभावों का उल्लेख कीजिये । 4
उत्तर - फरवरी क्रांति : 1917 की सर्दियों में राजधानी
पेत्रोग्राद में हालात बिगड़ गए।
(क) फरवरी क्रांति मुख्य
घटनाएं -
22 फरवरी - फैक्ट्री में
तालाबंदी घोषित।
23 फरवरी - हड़ताली मजदूरों के समर्थन में पचास अन्य फैक्ट्रियों के मजदूरों
ने भी हड़ताल का ऐलान कर दिया। आंदोलनकारी ‘जनता बस्ती’
पार करके राजधानी के बीचां-बीच -नेव्स्की प्रोस्पेक्ट- तक आ गए। जब फैशनेबल
रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को मजदूरों ने घेर लिया तो सरकार ने कर्फ्यू लगा
दिया। शाम तक प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए।
24 फरवरी - शाम को मजदूर फिर से इकट्ठा होने लगे। तो सरकार ने नजर रखने
सैंनिकों और पुलिस को तैनात कर दिया।
25 फरवरी - सरकार ने ड्यूमा को बर्खास्त कर दिया।
26 फरवरी - प्रदर्शनकारियों ने फैशनेबल इलाके, रिहायशी इलाके और कारखानों को घेर लिया।
27 फरवरी - प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय को तहस - नहस कर दिया।
02 मार्च - जार ने गद्दी छोड़ दी और रूस में अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाल
लिया।
फरवरी क्रांति के प्रभाव
:
(क) फरवरी के बाद जनसाधारण तथा संगठनों की बैठकों पर से प्रतिबंध हटा लिया गया।
(ख) पेत्रोग्राद सोवियत की तरह ही सभी जगह सोवियत बन गई यद्यपि इनमें एक जैसी
चुनाव प्रणाली का अनुसरण नहीं किया गया।
(ग) अप्रैल 1917 में बोल्शेविकों के नेता
व्लादिमीर लेनिन देश निकाले से रूस वापस लौट आए। उसने “अप्रैल थीसिस’ के नाम से जानी जाने वाली तीन मांगें रखीं। ये तीन मांगें थीं :
युद्ध को समाप्त किया जाए, भूमि किसानों को हस्तांतरित की जाए और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
(घ) उसने इस बात पर भी
जोर दिया कि अब अपने रेडिकल उद्देश्यों को स्पष्ट करने के लिए बोल्शेविक पार्टी का नाम बदलकर कम्युनिस्ट
पार्टी रख दिया जाए।
अथवा
रूसी क्रांति का विश्व पर क्या
प्रभाव पड़ा? लिखिए ।
उत्तर – रूस की क्रान्ति का वैश्विक प्रभाव इस प्रकार है-
रूस की देखा-देखी अन्य सरकारों ने भी अपनी प्रजा की रोटी, कपड़ा व मकान
जैसी मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति को अपना मुख्य कर्तव्य समझना शुरू किया। जब राष्ट्रसंघ
की नींव रखी गई तो उसने विश्वभर के श्रमिकों की दशा सुधारने के लिए एक विशेष संस्था
का निर्माण किया। यह संस्था अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसी
प्रकार अनेक सरकारों ने शिक्षा देने का कार्य चर्च से छीन लिया। पहले विश्वयुद्ध के
बाद समाजवादी आंदोलन मोटे तौर पर दो भागों-सोशलिस्ट पार्टियों और कम्युनिस्ट पार्टियों
में बँट गया। समाजवाद लाने की विधियों बल्कि समाजवाद की परिभाषा को लेकर भी उनके बीच
अनेक मतभेद थे। इन मतभेदों के बावजूद अपने उदय के कुछ ही दशकों के अन्दर समाजवाद सबसे
अधिक स्वीकृत विचारधाराओं में से एक बन गया। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद समाजवादी आंदोलन
के प्रभाव को फैलना कुछ सीमा तक रूसी क्रांति का परिणाम है। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल
(कोमिंटर्न), जिसका गठन पहली और दूसरी अन्तर्राष्ट्रीय क्रान्ति की तर्ज पर
किया गया था, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रांतियों को प्रोत्साहन देने का साधन
था। समाजवादी आन्दोलन में फूट पड़ गई। सोशलिस्ट पार्टियों के वामपंथी धड़ों ने अब स्वयं
को कम्युनिस्ट पार्टियों के रूप में ढाल लिया। दुनिया के अधिकांश देशों में कम्युनिस्ट
पार्टियों की स्थापना हुई जो कम्युनिस्ट इंटरनेशनल से संबंधित थीं। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल
एक ऐसा मंच बन गया जहाँ नीतियों पर विचार-विमर्श होते थे और दुनिया में लागू करने के
लिए साझी नीतियाँ तय होती थीं। 1943 ई. में कोमिंटर्न को समाप्त कर दिया। क्रांति ने
राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक
सभी क्षेत्रों में क्रान्ति ला दी। रूस की साम्यवादी सरकार को देखकर संसार के अन्य
देशों, जैसे चीन व वियतनाम
इत्यादि देशों में भी साम्यवादी सरकारें बनीं।। रूस की क्रान्ति के बाद पूरे विश्व
में पूँजीपतियों व मजदूर वर्ग में एक निरंतर संघर्ष-सा चल पड़ा। रूस में किसान व मजदूर
वर्ग की सरकार स्थापित हो जाने से इस वर्ग का सम्मान संसार के अन्य देशों में भी बढ़ा।
जब दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ तब तक सोवियत संघ
की वजह से समाजवाद को एक वैश्विक पहचान और हैसियत मिल चुकी थी।
प्र.22- भारत देश में कौन सी शासन प्रणाली
है? इसकी विशेषताओं को लिखिए ।
उत्तर – भारत में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था
है , इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं
-
1. एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक वयस्क नागरिक
को एक वोट देने का अधिकार है और प्रत्येक वोट का समान महत्त्व है। कोई भी नागरिक किसी
भी जाति, धर्म, सामाजिक,
आर्थिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि का हो वह किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ सकता
है जिसका अर्थ यह है कि सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त है।
2. एक लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों एवं नागरिक
अधिकारों के दायरे में रहते हुए शासन करती है।
3. लोकतांत्रिक देशों में शासकों का चयन जनता करती
है जो सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।
4. इसमें स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव होते हैं।
चुनाव लोगों के सामने वर्तमान शासकों को बदलने का एक विकल्प एवं अच्छा अवसर प्रदान
करते हैं।
5. चुनाव के पहले और बाद में भी विपक्षी दलों को
स्वतन्त्र रूप से काम करते रहने की अनुमति है।
6. इसमें अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता होती है और लोग
मौलिक अधिकारों का प्रयोग करते हैं।
ऐसी सरकारें राजनैतिक समानता के मौलिक सिद्धान्त
पर आधारित होते हैं।
अथवा
लोकतंत्र शासन प्रणाली के खिलाफ
तर्क लिखिए ।
उत्तर - लोकतांत्रिक
व्यवस्था के खिलाफ तर्क इस प्रकार हैं -
·
लोकतंत्र भ्रष्टाचार
को बढ़ावा देता है क्योंकि यह चुनावी प्रतिस्पर्धा पर आधारित है।
· निर्वाचित
नेता लोगों के सर्वश्रेष्ठ हितों से परिचित नहीं होते हैं। ऐसे में वे अनेक गलत निर्णय
करते हैं जिससे जनसामान्य को कष्ट होता है।
· लोकतन्त्र
में नेता बदलते रहते हैं। यह अस्थिरता का कारण बनता है।
· लोकतन्त्र
राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता एवं शक्ति का खेल है। इसमें नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं
है।
· जनसाधारण
को यह पता नहीं होता है कि उनके लिए क्या करना अच्छा है, उन्हें कोई निर्णय
नहीं लेने दिया जाता है।
लोकतंत्र
शासन प्रणाली के ख़िलाफ़ कुछ अन्य तर्क ये हैं:
·
लोकतंत्र में नेताओं का बदलना
अस्थिरता पैदा करता है।
·
लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
और सत्ता का खेल होता है।
·
लोकतंत्र में कई लोगों से सलाह लेनी
होती है, इसलिए फ़ैसले
लेने में देरी होती है।
·
चुने हुए प्रतिनिधि यह नहीं जानते कि
लोगों के लिए क्या अच्छा है।
·
लोकतंत्र में चुनावी प्रतिस्पर्धा के
कारण भ्रष्टाचार होता है।
·
कर प्रणाली की अपारदर्शी प्रकृति से
राजकोषीय भ्रम पैदा होता है।
·
अभिजनवाद लोकतंत्र का अर्थ ही बदल
देता है और इसे स्वेच्छाचारी बना देता है।
·
अभिजनवाद लोकतंत्र की परंपरागत
पुरातन अवधारणा के नैतिक उद्देश्य को समाप्त कर देता है।
·
अभिजनवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के
द्वारा मौलिक परिवर्तन लाने के बदले प्रणाली के स्थायित्व बनाए रखने पर ही ज़्यादा
ज़ोर देता है।
· कार्ल मार्क्स ने कहा कि उदारवाद पर्याप्त लोकतांत्रिक नहीं है।
प्र.23- निम्नलिखित को भारत के मानचित्र में अंकित कीजिए - 4
i. सतपुड़ा श्रेणी
ii. छोटा नागपुर का पठार
iii. मालाबार तट
iv. कावेरी नदी
अथवा
i. विंध्यांचल श्रेणी
ii. के 2
iii. कोरोमंडल तट
iv. गंगा नदी
शुभकामनायें
Subscribe – https://www.youtube.com/eClassesByManishSir
...000...